भगवान के 12 ज्योतिर्लिंगों में पांचवें ज्योतिर्लिंग का नाम है केदारनाथ। ये ज्योतिर्लिंग उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। हर साल आम दर्शनार्थियों के लिए ये मंदिर खासतौर पर गर्मी के दिनों में ही खोला जाता है। शेष समय यहां का वातावरण प्रतिकूल रहता है। केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए भारत के किसी भी शहर से ट्रेन द्वारा हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचा जा सकता है। हरिद्वार और ऋषिकेश से केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए आवागमन के कई साधन मिल जाते हैं, जिनकी मदद से सड़क मार्ग से केदारनाथ धाम पहुंच सकते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए केदारनाथ धाम से जुड़ी कुछ खास बातें…

केदारनाथ धाम से जुड़ी खास बातें

नर-नारायण की पूजा से प्रसन्न हुए थे शिवजी

केदरनाथ धाम से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित है। शिवपुराण की कोटीरुद्र संहिता के अनुसार प्राचीन समय में बदरीवन में विष्णु भगवान के अवतार नर-नारायण पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का रोज पूजन करते थे। उनके पूजन से प्रसन्न होकर भगवान शंकर वहां प्रकट हुए। शिवजी ने नर-नारायण से वरदान मांगने को कहा, तब जग कल्याण के लिए नर-नारायण ने वरदान मांगा कि शिवजी हमेशा उसी क्षेत्र में रहें। शिवजी प्रसन्न हुए तथा उन्होंने कहा कि अब से वे यहीं रहेंगे और यह क्षेत्र केदार क्षेत्र के नाम से जाना जाएगा।

बारह ज्योतिर्लिंगों में पांचवां ज्योतिर्लिंग है केदारनाथ

महादेव ने नर-नारायण को वरदान देते हुए कहा कि जो भी भक्त केदारनाथ के साथ ही नर-नारायण के दर्शन करेगा, वह सभी पापों से मुक्त हो जाएगा और अक्षय पुण्य प्राप्त करेगा। ये वरदान देकर शिवजी ज्योति स्वरूप में वहां स्थित लिंग में समा गए। देश में बारह ज्योर्तिलिंगों में इस ज्योतिर्लिंग का क्रम पांचवां है।

स्वयं प्रकट हुआ है केदारनाथ शिवलिंग

केदारनाथ धाम हिमालय की गोद में स्थित है। इसी वजह से अधिकांश समय यहां का वातावरण प्रतिकूल रहता है। इसी वजह से केदारनाथ धाम दर्शनार्थियों के लिए हमेशा खुला नहीं रहता है। मुख्य रूप से यह मंदिर अप्रैल से नवंबर के बीच दर्शन के लिए खोला जाता है। इस शिवलिंग के विषय में ऐसा माना जाता है कि यह स्वयंभू शिवलिंग है। स्वयंभू शिवलिंग का अर्थ है कि यह स्वयं प्रकट हुआ है। मान्यताओं के अनुसार केदारनाथ मंदिर का निर्माण पाण्डव वंश के राजा जनमेजय ने करवाया था और आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का जिर्णोद्धार करवाया था।

ऊंचे चबूतरे पर बना है मंदिर

केदारनाथ मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर के मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा करने का मार्ग है। मंदिर बाहर परिसर में शिवजी के वाहन नन्दी बैल विराजित हैं। यहां शिव का पूजन विशेष विधि से किया जाता है, जो कि काफी प्राचीन है। सुबह-सुबह शिवलिंग को स्नान कराया जाता है। घी का लेपन किया जाता है। इसके बाद धूप-दीप आदि पूजन सामग्रियों के साथ भगवान की आरती की जाती है। शाम के समय भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है।

Input : Dainik Bhaskar

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